महोबा। यात्रियों की सुविधा और रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप देने के नाम पर गतिशक्ति योजना के तहत भारी-भरकम बजट से तैयार किए गए महोबा रेलवे स्टेशन के नए प्लेटफार्म ओवरब्रिज की पहली ही बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी। उद्घाटन से पहले ही ओवरब्रिज के यात्री शेड में जगह-जगह से पानी टपकने लगा और कई हिस्सों में बारिश का पानी तेज धार के साथ बहता दिखाई दिया।

ओवरब्रिज को यात्रियों को बारिश और धूप से राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन पहली बारिश में ही पूरे शेड में लीकेज की स्थिति सामने आने से निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के दौरान यात्रियों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि उद्घाटन से पहले ही करोड़ों की लागत से बने इस निर्माण की यह हालत है, तो आने वाले समय में इसकी स्थिति क्या होगी?

ओवरब्रिज का निर्माण पूरा होने के बाद इसे यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन पहली बारिश ने ही निर्माण में बरती गई कथित लापरवाही को सामने ला दिया। शेड की छत से कई स्थानों पर पानी टपकने और बहने से निर्माण सामग्री, सीलिंग तथा जल निकासी व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारी-भरकम बजट से तैयार किए गए इस महत्वपूर्ण यात्री सुविधा वाले निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई? क्या निर्माण पूरा होने से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण हुआ था तो लीकेज जैसी खामियां अधिकारियों की नजर से कैसे बच गईं?
यात्रियों का कहना है कि जिस ओवरब्रिज को आधुनिक यात्री सुविधा का उदाहरण बताया जा रहा था, वह पहली बारिश में ही पानी रोकने में नाकाम साबित हुआ है। इससे निर्माण एजेंसी के साथ-साथ निगरानी और गुणवत्ता जांच करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

मामले में अब जरूरत है कि संबंधित विभाग पूरे ओवरब्रिज का तकनीकी निरीक्षण कराए और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था तथा कार्य की स्वीकृत तकनीकी शर्तों की जांच कराए। यदि मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार निर्माण एजेंसी और निगरानी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
उद्घाटन से पहले ही पहली बारिश में करोड़ों के ओवरब्रिज की यह तस्वीर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—क्या सरकारी धन से हुए निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की?
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