महोबा। शनिवार की जोरदार बारिश ने रेलवे के नए बजरिया अंडरब्रिज की निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। करीब 8 करोड़ 55 लाख रुपये की लागत से तैयार अंडरब्रिज में बारिश के दौरान जगह-जगह से पानी रिसता नजर आया। दीवारों से पानी इस तरह फूटा कि नया अंडरब्रिज रास्ते के बजाय बरसाती झरने का रूप लेता दिखाई दिया।

बारिश के पानी से बचाव के लिए शेड समेत अन्य इंतजाम किए जाने के बावजूद पहली ही तेज बारिश में व्यवस्था बेअसर नजर आई। हालात बिगड़े तो रेलवे को जनरेटर और पंप लगाकर पानी निकालने की कवायद करनी पड़ी। कर्मचारियों की मेहनत अपनी जगह है, लेकिन सवाल उस व्यवस्था पर है जिसे करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी बारिश के कुछ घंटों में ही पंप और जनरेटर के सहारे संभालना पड़ा।

नए अंडरब्रिज की व्यवस्था जहां सवालों में आई, वहीं पुराने बजरिया अंडरब्रिज में जलभराव ने हालात और गंभीर कर दिए। पानी इतना भर गया कि रोडवेज बस उसमें डूब गई और इंजन खराब होने की बात सामने आई। बस में सवार यात्रियों को पानी के बीच से निकलकर अपनी जान बचानी पड़ी। बाद में जेसीबी की मदद से बस को बाहर निकालने की कवायद शुरू की गई।
यह सिर्फ बस के इंजन को हुए संभावित आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है। बड़ा सवाल यात्रियों की सुरक्षा का है। यदि पानी का स्तर कुछ और बढ़ जाता तो यात्रियों की जान पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।

नए अंडरब्रिज को बेहतर और आधुनिक निर्माण के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया था। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी अनिरुद्ध कुमार द्वारा इसे बेहतर निर्माण के बेंचमार्क के रूप में प्रस्तुत किए जाने के दावों के बीच अब बारिश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि निर्माण के दौरान जलनिकासी, वाटरप्रूफिंग और बारिश के पानी के संभावित रिसाव का आकलन किस स्तर पर किया गया? यदि डिजाइन और निर्माण मानकों के अनुरूप थे तो पहली ही जोरदार बारिश में दीवारों से पानी का रिसाव क्यों हुआ?

महोबा के अंडरब्रिजों में बारिश के दौरान जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश आती है, अंडरब्रिज भरते हैं, यात्री परेशान होते हैं और फिर पानी निकालने के लिए मशीनें मौके पर पहुंचती हैं। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के बावजूद स्थायी जलनिकासी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा सकी?
केंद्र और राज्य सरकारें बुनियादी ढांचे पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। ऐसे में नई परियोजना का उद्देश्य केवल निर्माण पूरा करना नहीं, बल्कि उसे भविष्य की परिस्थितियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ बनाना भी होना चाहिए।
मामले में अब सिर्फ पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा। नए अंडरब्रिज में पानी कहां से और क्यों रिस रहा है, इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच जरूरी है। निर्माण गुणवत्ता, ड्रेनेज डिजाइन, शेड, वाटरप्रूफिंग और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच कराई जानी चाहिए।
यदि जांच में डिजाइन की खामी, निर्माण में लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्था की जवाबदेही तय कर कार्रवाई होनी चाहिए।
बारिश ने सिर्फ अंडरब्रिज में पानी नहीं भरा, बल्कि करोड़ों के निर्माण की गुणवत्ता, रेलवे की निगरानी और जलनिकासी की तैयारियों पर सवालों की बाढ़ ला दी है। बारिश हर साल आएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर साल महोबा के अंडरब्रिज इसी तरह डूबते रहेंगे और जिम्मेदार सिर्फ पंप-जनरेटर चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करते रहेंगे?
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