महोबा। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को महोबा जनपद में निराश्रित गोवंश संरक्षण, भूसा भंडारण, गोचर भूमि पर हरा चारा उत्पादन तथा पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को वर्षा ऋतु से पहले सभी गौ आश्रय स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में विधायक चरखारी बृजभूषण सिंह राजपूत, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, अपर निदेशक गोधन पशुपालन निदेशालय लखनऊ, अपर निदेशक ग्रेड-2 चित्रकूटधाम मंडल बांदा, समस्त उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि आगामी मानसून को देखते हुए सभी गौशालाओं में गोवंशों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां जलभराव की आशंका हो वहां तत्काल खंडजा-पंडजा का निर्माण कराया जाए तथा गोवंशों के सुरक्षित ठहराव के लिए चबूतरे तैयार किए जाएं, ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने बड़ी गौशालाओं में गोबर गैस संयंत्र स्थापित कर उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने पर विशेष जोर दिया। साथ ही निर्देशित किया कि गौशालाओं में संरक्षित सभी गोवंशों तथा जिले के अन्य पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण कराया जाए, जिससे संक्रामक बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित हो सके।
मंत्री ने गोचर भूमि पर नेपियर घास की बुवाई कराने के निर्देश भी दिए, ताकि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराया जा सके और उनके पोषण स्तर में सुधार हो।

बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि गौशालाओं में भूसा बैंक विकसित किए जा रहे हैं, गोवंशों की नस्ल सुधार योजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है तथा चरागाह (गोचर) भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई जारी है।
उन्होंने बताया कि मोबाइल वेटरिनरी यूनिट की 1962 हेल्पलाइन के माध्यम से पशुओं के उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा नंद बाबा दुग्ध मिशन, मिनी नंदिनी योजना तथा डेयरी इकाइयों की स्थापना पर 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान देकर पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सरकार की सभी योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे तथा गोवंश संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

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