लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी पुलिस ने बीते एक वर्ष में नागरिक केंद्रित पुलिसिंग, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध पर अंकुश और पुलिस कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले वर्षों की तुलना में प्रदेश में अपराधों में कमी दर्ज की गई है। महिला सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, जागरूकता और सहायता के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि दहेज, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और महिलाओं से जुड़े अपराधों में कमी लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। कार्रवाई के बाद पीड़िताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था भी लागू की गई है। मिशन शक्ति के अंतर्गत कई श्रेणियों के अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है।
साइबर अपराध को बड़ी चुनौती बताते हुए डीजीपी ने कहा कि कोविड काल के बाद डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ साइबर अपराध बढ़े हैं। इससे निपटने के लिए यूपी पुलिस ने व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया है। प्रदेश के 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध जांच और रोकथाम का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। साइबर ठगी से जुड़े मामलों में अब तक 450 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई जा चुकी है।
डीजीपी ने बताया कि पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का भी उपयोग कर रही है। फेस रिकग्निशन और फेस एजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से फरार अपराधियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए अत्याधुनिक सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।
पुलिस कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शहीद और दुर्घटना में प्रभावित पुलिसकर्मियों के परिवारों को 137 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। पुलिसकर्मियों के लिए बीमा कवर, छात्रावास और निःशुल्क चिकित्सा सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
सड़क दुर्घटनाओं को लेकर डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों की पहचान कर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गठित समितियां लगातार निगरानी कर रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आई है।
उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मामलों में समयबद्ध चार्जशीट दाखिल करने, डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग और ई-सम्मन व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत मामलों में ई-सम्मन व्यवस्था लागू की जा चुकी है।
डीजीपी ने कहा कि आने वाले समय में संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और व्हाइट कॉलर अपराधियों के खिलाफ और अधिक प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही महिलाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों के मन में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण मजबूत करना यूपी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पार बैठे तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों पर एटीएस और एसटीएफ लगातार निगरानी रखे हुए हैं और हाल के दिनों में कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।


