महोबा। फसल बीमा के नाम पर किसानों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद चरखारी कोतवाली क्षेत्र के नटर्रा गांव में जमकर हंगामा हो गया। ग्रामीणों ने दो कथित सर्वेयरों पर किसानों को फसल बीमा का अधिक मुआवजा दिलाने का झांसा देकर रुपये वसूलने का आरोप लगाया। आक्रोशित ग्रामीणों ने दोनों को पकड़कर उनके साथ अनोखा व्यवहार किया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।
मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है, जिसमें ग्रामीण कथित सर्वेयरों को लिपस्टिक लगाकर, घाघरा-चोली और चूड़ियां पहनाकर तथा जूतों की माला डालकर गांव में घुमाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद फसल बीमा सर्वे के नाम पर होने वाली कथित वसूली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है!
ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों कथित सर्वेयर किसानों से फसल के नुकसान का अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर रुपये की मांग कर रहे थे। किसानों को शक होने पर ग्रामीणों ने दोनों से पूछताछ की और मामला बढ़ गया। इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों को पकड़ लिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि फसल बीमा सर्वे के नाम पर किसानों से वास्तव में रकम मांगी जा रही थी, तो यह बेहद गंभीर मामला है। किसानों का कहना है कि फसल खराब होने के बाद पहले ही आर्थिक संकट झेल रहे किसानों से मुआवजे के नाम पर किसी भी तरह की रकम मांगना उनके साथ अन्याय है।
हंगामे के बाद ग्रामीणों ने दोनों कथित सर्वेयरों को पुलिस के हवाले कर दिया। अब पूरे मामले में पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की वास्तविक भूमिका क्या थी, वे किस संस्था या कंपनी से जुड़े थे और किसानों से रुपये लेने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
महोबा में पहले भी सामने आ चुका है फसल बीमा का विवाद
फसल बीमा को लेकर महोबा पहले भी विवादों में रहा है। जिले में पूर्व में करोड़ों रुपये के कथित फसल बीमा घोटाले का मामला सामने आने के बाद किसानों को मिलने वाले बीमा मुआवजे और सर्वे प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नटर्रा गांव का यह मामला सामने आने से एक बार फिर फसल बीमा सर्वे की पारदर्शिता और किसानों से कथित वसूली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों कथित सर्वेयर अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर किसानों से वसूली कर रहे थे? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इनके पीछे कौन लोग या संस्था काम कर रही थी और अब तक कितने किसानों से रकम ली गई?
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। लेकिन नटर्रा गांव में सामने आया यह मामला फसल बीमा सर्वे व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर रहा है।
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