महोबा। न्यायालय के आदेश पर महोबा जिले में तैनात एक ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वादी का कहना है कि मुकदमा दर्ज होना न्याय की दिशा में पहला कदम है, लेकिन जब तक आरोपी की गिरफ्तारी और मामले में कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

मामला ग्राम पंचायत अधिकारी राहुल पाठक से जुड़ा है। शिकायतकर्ता समाजसेवी ओमकार ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि राहुल पाठक मूल रूप से मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले की पलेरा तहसील स्थित ग्राम लारौन के निवासी हैं। शिकायत के अनुसार उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई मध्यप्रदेश में हुई तथा उन्होंने वहीं वन रक्षक के पद पर भी सेवाएं दीं। इतना ही नहीं, उनके नाम से मध्यप्रदेश का मतदाता पहचान पत्र भी जारी हुआ था।

वादी ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवा का लाभ लेने के उद्देश्य से राहुल पाठक ने महोबा जिले के कुलपहाड़ तहसील अंतर्गत ग्राम सतारी, जो उनकी माता का मायका बताया गया है, वहां के पते के आधार पर निवास प्रमाणपत्र बनवाया। आरोप है कि इसके लिए परिवार रजिस्टर में भी नियमों के विपरीत नाम दर्ज कराया गया और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर नियुक्ति प्राप्त की।

शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि आरोपी के पिता के निधन के बाद मध्यप्रदेश स्थित पैतृक कृषि भूमि की विरासत संबंधी अभिलेखों में उनका पता मध्यप्रदेश का ही दर्ज है, जिससे यह साबित होता है कि उनका मूल निवास वहीं था। वादी ने अपने आरोपों के समर्थन में निवास प्रमाणपत्र, मतदाता पहचान पत्र, राजस्व अभिलेख, शासनादेश तथा जांच रिपोर्ट सहित कई दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन करने के बाद संबंधित थाना पनवाड़ी को उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में राहुल पाठक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
वादी पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि इस मुकदमे तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। उनके अनुसार निचली अदालत से पूर्व में कई बार प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया था, जिसके बाद सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई। सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनः सुनवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 10 जून 2026 को मुकदमा दर्ज करने का आदेश पारित किया। उसी आदेश के अनुपालन में अब थाना पनवाड़ी में एफआईआर दर्ज की गई है।
वादी ओमकार ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने से उन्हें आंशिक न्याय मिला है, लेकिन उनका उद्देश्य केवल एफआईआर दर्ज कराना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी की नियुक्ति और दस्तावेजों की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस ने न्यायालय के आदेश के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना के बाद ही आरोपों की सत्यता और आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
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